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Ayushman Card में नया अपडेट: अब किसे मिलेगा ₹10 लाख का फ्री इलाज? पूरी जानकारी आसान भाषा में

आयुष्मान भारत (Ayushman Card) देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य खुराक में से एक है, और हाल ही में इसमें एक बड़ा अपडेट आया है – कुछ विदेशी नागरिक और राज्य-विशिष्ट विशिष्टता के तहत अब ₹10 लाख तक का इलाज किया गया है। इस ब्लॉग में हम विस्तार से बताएंगे कि यह नया अपडेट क्या है, लोगों के लिए क्या है, सरकार का रोल क्या है, और इसके फायदे और चुनौतियाँ क्या हैं।

ऐतिहासिक पृष्टभूमि: आयुष्मान भारत की मूल संरचना

पहले यह खुलासा हुआ कि आयुष्मान भारत (PMJAY) मूल रूप से कैसे काम करता है। यह केंद्र सरकार की प्रमुख स्वास्थ्य बीमा योजना है, जो गरीब और सामाजिक-आर्थिक रूप से गरीब परिवारों को ₹5 लाख प्रति परिवार प्रति वर्ष तक का कैशलेस उपचार प्रदान करती है।

सितंबर 2024 में केंद्र सरकार ने यह फैसला लिया कि 70 साल और इससे अधिक उम्र के बुजुर्गों को उनकी आर्थिक स्थिति को देखते हुए बिना ₹5 लाख का स्वास्थ्य कवर दिया जाएगा।
यह पहले से ही एक बड़ा कदम था, क्योंकि इससे बुजुर्गों को भारी इलाज के खर्च में राहत मिलती है।

नया अपडेट: दिल्ली में ₹10 लाख तक का कवरेज

सबसे ताज़ा और महत्वपूर्ण अपडेट दिल्ली से आया है। दिल्ली सरकार ने “Ayushman Vay Vandana (वय वंदना)” योजना की शुरुआत की है, जिसमें:

  • दिल्ली में 70 साल और उससे ऊपर के वरिष्ठ नागरिकों को ₹10 लाख तक का सालाना स्वास्थ्य बीमा कवरेज मिलेगा।
  • इस कवरेज के पांच लाख रुपये केंद्र (Ayushman Bharat) से आएंगे, और बाकी पांच लाख रुपये दिल्ली सरकार वहन करेगी — यानी यह एक टॉप-अप कवर है।
  • इसके लिए केंद्र और दिल्ली सरकार ने एक MoU (समझौता) भी साइन किया है।
  • इस योजना की शुरुआत 28 अप्रैल 2025 को मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की थी, और पहले कार्ड वितरित किए गए।

इसका मतलब यह है कि दिल्ली में पैन-भारत PMJAY की लिमिट को राज्य-स्तर पर बढ़ाया गया है, खासकर बुज़ुर्गों के लिए।

संसद की सिफारिश: कवरेज बढ़ाकर ₹10 लाख, उम्र घटाकर 60 साल?

सरकारी स्तर पर केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि एक बड़े पैनल (Parliamentary Standing Committee on Health) ने भी सुझाव दिया है कि Ayushman Bharat कवरेज को ₹10 लाख तक बढ़ाया जाना चाहिए।

पैनल ने यह भी माना है कि वर्तमान में 70 साल की उम्र सीमा बहुत ऊँची है और इसको 60 साल तक लाया जाना चाहिए, ताकि अधिक बुज़ुर्ग लाभ उठा सकें।

पैनल ने अपने रिपोर्ट में यह भी कहा है कि स्वास्थ्य-देखभाल की गंभीर और महंगी बीमारियों में खर्च बहुत बढ़ गया है, इसलिए कवरेज बढ़ाने की ज़रूरत है।

बजट और फंडिंग: दिल्ली सरकार की भूमिका

दिल्ली की नई सरकार ने अपना पहला बजट पेश करते समय ही यह घोषणा की कि वह आयुष्मान योजना में अतिरिक्त 5 लाख रुपये का कवर देगी बजट में ₹2,144 करोड़ की राशि specifically PM Jan Arogya Yojana (Ayushman) के लिए रखी गई है।

यह राशि राज्य की तरफ से किया गया निवेश है ताकि दिल्ली के वरिष्ठ नागरिकों को बेहतर हेल्थ सिक्योरिटी मिल सके। इस कदम से यह साफ होता है कि दिल्ली सरकार स्वास्थ्य सेवा को प्राथमिकता दे रही है और बुज़ुर्गों की देखभाल के लिए प्रोत्साहित है।

लाभार्थी: किसे मिलेगा यह 10 लाख का कवर?

  • उम्र: मुख्य रूप से 70 वर्ष या उससे ऊपर के वरिष्ठ नागरिक।
  • आर्थिक स्थिति: नौकरी, आय या संपत्ति की जांच की शर्त नहीं है — यानी अमीर या गरीब, दोनों श्रेणियों के बुज़ुर्ग इसका लाभ ले सकते हैं।
  • पंजीकरण: लाभार्थियों को “वय वंदना कार्ड” बनवाना होगा। यह कार्ड एक डिजिटल हेल्थ कार्ड के रूप में भी काम करेगा, जिसमें मेडिकल रिकॉर्ड, आपातकालीन हेल्थ डेटा आदि संग्रहीत किया जा सकता है।
  • कैशलेस इलाज: यह कवर उन अस्पतालों में काम करेगा जो Ayushman Bharat (PM-JAY) से मंज़ूर (empanelled) हैं।

Ayushman Card का लाभ और महत्व

यह अपडेट बहुत मायने रखता है:

उच्च चिकित्सा खर्च में राहत – बुज़ुर्गों में क्रोनिक और गंभीर बीमारियों (जैसे कैंसर, हृदय रोग) की संभावना अधिक होती है। ₹10 लाख का कवर उन्हें इन महंगे इलाजों के खर्च से बचाने में मदद कर सकता है।

समावेशी सुरक्षा – क्योंकि केंद्र + राज्य मिलकर कवरेज दे रहे हैं, यह योजना उन बुज़ुर्गों के लिए ज्यादा पहुंचयोग्य हो जाती है जो सिर्फ केंद्र-स्कीम पर निर्भर रह रहे थे।

स्वास्थ्य रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण – वय वंदना कार्ड में हेल्थ रिकॉर्ड स्टोर करने की संभावना है, जिससे भविष्य में इलाज और आपातकालीन यह जानकारी तुरंत उपलब्ध हो सकती है।

राज्य-सरकार की भागीदारी – दिल्ली जैसा बड़ा राज्य इस तरह की स्वास्थ्य योजना पर निवेश कर रहा है, जिससे इसे अन्य राज्यों के लिए भी मॉडल के रूप में देखा जा सकता है।

चुनौतियाँ और चिंताएँ

हालाँकि यह स्कीम बहुत सकारात्मक कदम है, लेकिन कुछ चुनौतियाँ भी हैं जिन्हें नजरअंदाज़ नहीं किया जाना चाहिए:

पैनल सिफारिशें अभी पॉलिसी में नहीं पूरी तरह लागू: संसद पैनल ने ₹10 लाख कवरेज की मांग की है, लेकिन यह अभी देशभर में लागू नीति नहीं बनी है।

फंडिंग और बजट: केंद्र और राज्यों को फंड आबंटन में समन्वय बनाए रखने की जरूरत है, खासकर लॉन्ग टर्म में।

रजिस्ट्रेशन और कार्ड वितरण: वय वंदना कार्ड पाने के लिए पंजीकरण करना ज़रूरी है, और इस प्रक्रिया में टेक्नोलॉजी-सम्बंधित बाधाएं आ सकती हैं, खासकर उन बुज़ुर्गों के लिए जो डिजिटल पोर्टल उपयोग करने में कठिनाइयां महसूस करते हैं।

हॉस्पिटल empanelment: अगर बहुत सारे अस्पताल इस योजना में शामिल न हों, तो कवरेज का लाभ सीमित रह सकता है।

दावा प्रक्रिया (Claims): बीमारियों की गंभीरता और महंगी प्रक्रिया होने पर क्लेम प्रोसेसिंग का मुद्दा हो सकता है — लंबा प्रोसेस, दावे न होने जैसी दिक्कतें आ सकती हैं।

भविष्य की संभावनाएँ

अगर पैनल की सिफारिशें स्वीकार की जाएँ, तो 60+ उम्र के सभी बुज़ुर्गों को ₹10 लाख तक का कवरेज मिलना एक बड़ा सुधार होगा।

अन्य राज्यों में भी दिल्ली मॉडल को अपनाया जा सकता है, जिससे पूरे देश में वरिष्ठ नागरिकों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा मजबूत बनेगी।

स्वास्थ्य विभाग और स्थानीय सरकारें और अस्पताल मिलकर पंजीकरण अभियान (जैसे “वैन” या मोबाइल यूनिट्स) चला सकती हैं ताकि ज्यादातर बुज़ुर्गों को कार्ड मिल सके। (यह एक संभावित रणनीति हो सकती है, जैसा कि दूसरी सोशल स्कीम्स में देखा गया है)

डिजिटल हेल्थ रिकॉर्ड (जैसे वय वंदना कार्ड के अंदर) बेहतर इस्तेमाल होकर इलाज को और स्मार्ट बना सकते हैं — मरीजों का स्वास्थ्य ट्रैक करना आसान होगा, और डॉक्टरों को भी इतिहास पढ़ने में मदद मिलेगी।

निष्कर्ष

नया अपडेट — यानी आयुष्मान वय वंदना योजना के तहत ₹10 लाख तक का हेल्थ कवरेज — एक बहुत ही प्रगतिशील कदम है, खासकर बुज़ुर्गों के लिए। यह दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार के बीच मिलकर काम करने की सफलता का उदाहरण है। यदि यह मॉडल और विस्तारित रूप में अन्य राज्यों में भी अपनाया जाए, तो यह वरिष्ठ नागरिकों की स्वास्थ्य सुरक्षा के स्तर को बहुत ऊपर ले जा सकता है।

फिर भी, इस योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि पंजीकरण सहज हो, अस्पताल पर्याप्त संख्या में शामिल हों, और क्लेम प्रक्रिया पारदर्शी और तेज़ हो। अगर यह सब सही तरीके से काम किया जाता है, तो यह अपडेट लगभग क्रां त कारी साबित हो सकता है — और वास्तव में बहुत सारे बुज़ुर्गों की ज़िंदगी में फर्क ला सकता है।

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